देसी देसी

अपनों के लिए हुए हम परदेसी,दिल तो मगर है देसी देसी ! भारत से निकले हम तो, किस्मत अपनी आजमाने कोपेशा या पढ़ाई, नापे मंज़िल की गहराईछोड़ चले बचपन की गलियाँ, परदेस का आसमान छू लियापैसा कमाना है, घर बनाना है,बचपन का वो सपना सच कर दिखाना है लंडन हो या अमरीका, कड़ी मेहनत, यही…… Continue reading देसी देसी