किसिका बाप अंबानी, बच्चन, धोनी, गेट्स होता है, किसिका डॉक्टर, फ़ौजी, कुली, माली होता है,
चाहे जो भी काम करे, या ना करे, बाप तो बाप ही होता है!

चोट लगने पर बच्चा माँ से बिलगता है, लेकिन चोट देने वाले से बाप ही निपटता है,
चाहे किसिको डराना हो, या छोटासा ख़टमल भगाना हो, ये दोनो ही काम, अक्सर बाप ही करता है

कभी रोटी जल जाए या खाने मे नमक हो ज़्यादा, “मुझे तो ऐसी कुरकुरी रोटी ही पसंद है,”
कहकर एक तीर मे दो निशान मारता हैक्यूकी बाप तो बाप होता है

दफ्तर मे ज़्यादा काम हो, तो माँ थक जाती हैतब पिज़्ज़ा पार्टी का प्लान बाप ही बनाता है
जितना भी पैसा कमाले माँ, बच्चों की फी का जिम्मा तो बाप ही उठाता है!

बेटी चाहे माँ के कितने भी हो करीब, जीवन साथी मे बाप की छवी मिल जाए, तो कहते खुशनसीब
बेटा बड़ा होकर आईने में बाप को ढूंडता है, क्यूकी यारो, बाप तो बाप होता है

और क्या बताए इस ग़ज़ब इंसान की दास्तान, जिसके नाम से रौशन है हमारा जहां,
कभी डाँटकर, फटकारकर समझाता है, तो कभी आँखों की एक झलक से ही मन की बात बताता है,

बच्चों की, घर की, नीव बन जाता है, उसके अंदर छुपा भी एक इंसान होता है
माँ की ममता तो सब जानते हैं, लेकिन बाप, वो तो जादूगर होता है!

यूँही नही कहते उसे, बेटी का पहला प्यार, और बेटे का हीरो,
हर घर का बाप सूपरहीरो होता है!!

ये बाप हर मर्द मे होता हैं,
भाई, मित्र, पति, पिता, ससुर, बेटा, दामाद, और भी कई रोल, वो बखूबी निभाता है!

आँसू निगलके, मुस्कुराके, लाडली को वो बिदा करता है,
बेटे का भविष्या सुहाना हो, इसलिए कड़ी मेहनत करता है,
तुम दुनिया मे कही भी रहो, खुश रहो, सलामत रहो, बस यही दुआ दिन-रात करता है.

अगर नाराज़ हो अपने बाप से, फिर भी माफ़ कर देना,
माँ की कोक का अगर है क़र्ज़, तो बाप के नाम का भी तो फ़र्ज़ है चुकाना!

(I am still working on fixing the spelling mistakes in this poem 🙂 )